You are here: Home Most Popular Poetry/शायरी कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाये है मुझ से - ग़ालिब

cgspice.com

कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाये है मुझ से - ग़ालिब

E-mail Print
User Rating: / 0
PoorBest 

कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाये है मुझ से,
जफायें कर के अपनी याद शर्मा जाये है मुझ से।

खुदाया, जज़्बा-ऐ-दिल की मगर तासीर उल्टी है,
के जितना खींचता हूँ और खिंचता जाये है मुझ से।

वो बद-खू और मेरी दास्तान-ऐ-इश्क तूलानी,
इबारत मुख्तसर, क़ासिद भी घबरा जाये है मुझ से ।

उधर वो बद-गुमानी है, इधर ये नातुवानी है,
ना पूछा जाये है उस से, ना बोला जाये है मुझ से ।

संभलने दे मुझे ऐ ना-उम्मीदी क्या क़यामत है,
कि दामन-ऐ-ख़याल-ऐ-यार छूटा जाये है मुझ से ।

तकल्लुफ़ बर-तरफ़ नज्ज़ारगी मैं भी सही लेकिन,
वो देखा जाये कब ये ज़ुल्म देखा जाये है मुझ से ।

हुए हैं पाँव ही पहले नबर्द-ऐ-इश्क में ज़ख्मी,
ना भागा जाये है मुझ से ना ठहरा जाये है मुझ से ।

क़यामत है कि होवे मुद्दई का हम-सफर गालिब,
वो क़ाफिर जो खुदा को भी ना सौंपा जाये है मुझ से ।

More Popular Articles


 

Add comment


Security code
Refresh

Astrology - ज्‍योतिष

Marriage life and Astrology - ज्योतिष और वैवाहिक सुख

Marriage life and Astrology - ज्योतिष और वैवाहिक सुख

विवाह समाज द्वारा स्थापित एक प्राचीनतम परम्परा है जिसका उद्देश्य काम -संबंधों को मर्यादित करके सृष्टि की रचना में सहयोग ...
More on Astrology - ज्‍योतिष

Jokes

Husband and Wife in court : divorce

Husband and Wife in court : divorce

Scene: Husband and Wife in court getting a divorce. The problem was who should get custody of the child? ...
More on Jokes

Beauty & Style

Marriage & Relationship