16 जुलाई 2007 से शनि सिंह राशि में चल रहा है और सितम्बर 2009 तक यह इस राशि में रहेगा. इस दौरान कर्क, सिंह और कन्या के ऊपर साढ़े साती का प्रभाव रहेगा. चूकि शनि की गति मंद होती है इसलिए यह एक राशि में 30 महीने यानी ढ़ाई वर्ष रहता है .
शनि के चरण वर्तमान राशि से अगले और पिछली राशि में होने के कारण शनि का प्रभाव साढ़े सात वर्ष तक रहता है. सिंह सूर्य की राशि मानी जाती है और शनि को सूर्य का पुत्र. जब शनि अपने पिता की राशि में प्रवेश करता है तो वह और अधिक तेजस्वी हो जाता है. इसके नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं.
साढ़े साती से प्रभावित राशि (Moon signs affected by Saturn)
साढ़े सात वर्ष तक शनि का प्रभाव होने के कारण इसे शनि की साढ़े साती के नाम से जाना जाता है. जिस राशि में शनि प्रवेश करता है उसके सिर पर साढ़े साती होती है, जिस राशि से शनि उतरती है उस राशि पर उतरती साढ़े साती होती है और जिस अगली राशि में शनि का प्रवेश होने वाला होता है उस पर चढ़ती साढ़े साती होती है. इस समय शनि सिंह राशि में है जो सूर्य की राशि मानी जाती है. शनि को सूर्य पुत्र कहा जाता है इसलिये अपने पिता की राशि में आकर शनि और भी बलशाली और प्रभावशाली हो जाता है.
शनि का प्रभाव (Effect of Shani)
शनि बहुत धीमे चलने वाला गह है इसलिए इसका प्रभाव भी गहरा होता है. शनि की साढ़े साती किसी के लिए अच्छा होता है तो किसी के लिए बुरा फिर भी सभी लोग साढ़े साती से भयभीत रहते हैं. साढ़े साती आने पर जिनके लिए शनि शुभ होता हैं वे सोच विचार कर निर्णय लेते हैं जिससे उन्हें अच्छा फल मिलता है और जिनके लिए शनि अशुभ होता है वे जल्दबाजी में ऐसा निर्णय कर लेते हैं जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. दूसरी बात यह है कि गोचर में एक राशि से दूसरी राशि में शनि के प्रवेश करते ही साढ़े साती का प्रभाव शुरू नहीं हो जाता है. शनि का प्रभाव शुरू होने में वक्त लगता है इसका कारण यह है कि यह साढ़े सात वर्ष में सिर्फ 90 ही चलता है. 90 डिग्री का मतलब हुए केन्द्र स्थान से 45 आगे और 45 पीछे. जन्म कुण्डली में यह केन्द्र चन्द्रमा का अंश माना जाता है. जन्म कुण्डली में जितने अंश पर चन्द्रमा होता है उससे 45 पहले शनि के आने से साढ़े साती शुरू होगी और इतने ही अंश जब शनि उस बिन्दु से आगे चला जाता है तो साढ़े साती का अंत हो जाता है.
शनि का डर (Fear of Saturn)
व्यक्ति के मन में शनि का डर होने के कारण यह है कि शनि ग्रह को ज्योतिषशास्त्र के विभिन्न ग्रंथों में अशुभ ग्रह कहा गया है. जो तमोगुण, निराशा, असफलता, कठोर, बदनामी, बीमारी, निर्घनता एवं मृत्यु का कारक कहा गया है. साढ़े साती की दशा में व्यक्ति को इन स्थितियों से गुजरना होता है जो काफी कष्टकर होता है इसलिए शनि की साढ़े साती के नाम से लोग डरे रहते हैं. यह सही है कि इस तरह की स्थिति का सामना साढ़े साती में करना होता है परंतु यह भी सही है कि सभी ग्रह जन्म कुण्डली में अपनी स्थिति, युति व दृष्टि आदि के आधार पर फल देते हैं अत जन्मपत्री में सभी स्थितियों को देखने के बाद ही शनि की शुभता या अशुभता के विषय में विचार करना चाहिए.
साढ़े साती उपाय (Remedies of Saturn's Sadesati)
जिस प्रकार किसी रोग से पीड़ित होने पर आप चिकित्सक की सलाह से दवाईयां लेते हैं उसी प्रकार किसी ग्रह की पीड़ा से बचने के लिए किसी कुशल ज्योतिषशास्त्री की सहायता से ग्रह शांति करानी चाहिए. साढ़े साती की स्थिति में शनि की शांति का उपाय करना लाभप्रद होता है. आप चाहें तो साढ़े साती के अशुभ प्रभाव में कमी लाने के लिए महामृत्युजय जाप करायें. शनि की वस्तुओं का शनिवार के दिन दान करें. शनि देव को काला तिल और सरस तेल का भेंट करें. उड़द दाल में खिंचड़ी बनाकर शनिवार को इसका सेवन करें. काले घोड़े की नाल अथवा नव की कांटी से अंगूठी बनवारक शनिवार के दिन धारण करें.


















